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एग्जीबिशन में लोग जानेंगे, नोबेल विजेताओं ने कैसे दुनिया की बेहतरी के लिए किया काम

September 12, 2019 12:10 PM

Star Khabre, Faridabad; 12th September : नेशनल एग्री फूड बायो-टेक्नोलॉजी इंस्टीटयूट (नाबी) में नोबेल प्राइज सीरीज इंडिया 2019 की ट्रेवलिंग एग्जीबिशन 'फॉर द ग्रेटेस्ट बेनिफिट ऑफ ह्यूमनकाइंड' का शुभारंभ किया गया। इस एग्जीबिशन में नोबेल पुरस्कार जीतने वाले नोबेल विद्वानों ने किस तरह इस दुनिया को बेहतर बनाया है इसे दर्शाया गया है। इस मौके स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू, नोबल विनर डॉ. सर्ज हारोचे व डॉ. कैलाश सत्यार्थी सहित कई गणमान्य लोग मौजूद थे। इसके अलावा क्लिनिकल इंटीग्रेटिव फीजियोलाजी की प्रोफेसर और स्वीडेन में कैरोलींस्का इंस्टीट्यूट में नोबल कमेटी की सदस्य डॉ. जुलेन जीरथ भी मौजूद थी।

इस मौके नोबल विजेता कैलाश सत्यार्थी ने टीचर्स व स्टूडेंट्स के साथ बातें की और उनके मोबाइल से सेल्फी ली। ट्रेवलिंग एग्जीबिशन वर्ल्ड प्रीमियर तीन दिवसीय कार्यक्रम नोबल प्राइज सीरीज इंडिया 2019 का हिस्सा है जो लुधियाना और दिल्ली में भी होगा। इसका मकसद पढ़ाने एवं सीखने के अहम मसलों को सामने रखना है।

इस अवसर पर नोबल विद्वान व्याख्यान देंगे और अन्य विशेषज्ञों शिक्षकों और विद्यार्थियों के साथ विचार गोष्ठी में भाग लेंगे। प्रदर्शनी में दिखाया गया है कि नोबल विद्वानों ने किस तरह इस दुनिया को बेहतर बनाया है। लोगों की जान बचाने, मानवता के लिए भोजन सुनिश्चित करने, लोगों को आपस में जोड़ने और धरती की सुरक्षा से जुड़ी उनकी खोजों और उपलब्धियों को इस प्रदर्शनी में दिखाया गया है।

इस मौके प्रो. सर्ज हारोश, 2012 फिजिक्स के संयुक्त नोबेल विनर ने कहा कि साइंस में भावनाऐं व ओपिनियन नहीं होती। बच्चों को चाहे जो पढ़ाएं, बस उनकी इमेजिनेशन और क्रिएटविटी को खत्म न करें। उनके सवालों का सम्मान करें। तर्क करने दें। प्रयोग करने दें। गलतियां करने दें। अपनी राह वे खुद बना लेंगे।

उन्हें साइंस पढ़ाइए या ह्यूमैनिटीज, प्यार और सादगी आपको उनसे ही सीखनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि राजनीति धर्म और राष्ट्रवाद साइंस को पूरी दुनिया में चैलेंज कर रहे हैं। लोगों को एक दूसरे के खिलाफ खड़ा कर रहे हैं। साइंस को इससे दिक्कतें तो हैं लेकिन खतरा नहीं।

ये लोग अगर दुनिया को बांटेंगे तो भी सांइस ग्लोबली एक ही रहेगी। अगर सांइस न बची तो फिर कुछ भी नहीं बचेगा। उन्होंने भारत के चंद्रयान मिशन पर कहा कि साइंस रिस्की चीज है। इसमें गलती होना नॉर्मल है। चंद्रयान बहुत अच्छी कोशिश थी।

एग्जीबिशन में पहुंचे 2014 के संयुक्त नोबल पीस प्राइज विनर डॉ. कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि मैं बच्चों में भविष्य नहीं वर्तमान देखता हूं। उन्होंने कहा कि जरूरत है कि उनमें इन्वेस्ट किया जाए। उनकी एजूकेशन और हेल्थ प्राथमिकता होनी चाहिए। दुखद है कि ऐसा नहीं हो रहा।

शिक्षा में कहां गड़बड़ नजर आती है के सवाल पर उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी गड़बड़ यही है कि हम उन्हें नफरत, भेदभाव, बनावट और छल सिखा रहे हैं। बच्चों ने कभी युद्ध नहीं छेड़े लेकिन वे युद्धों की मार सबसे ज्यादा झेलते हैं। दरअसल, अब समय है कि हमें उन्हे सिखाना बंद करके उनसे सत्य, पारदर्शिता, सादगी, क्षमा और प्रेम सीखना चाहिए।

इस मौके एरीका लैनर निदेशक, नोबल प्राइज म्यूजियम, स्टाकहोम, स्वीडेन ने बताया कि आज ग्लोबल वार्मिंग, भोजन की कमी, बीमारी या आपसी युद्ध जैसी कई बड़ी चुनौतियां मानवता के सामने हैं। नोबल पुरस्कार का इतिहास बताता है कि चुनौतियों से नया रास्ता निकलता है। विज्ञान साहित्य और शांति के प्रयास से स्थिति में सुधार और दुनिया में बदलाव आ सकता है। डा रेणु स्वरूप, सचिव, जैव तकनीक विभाग ने बताया नोबल प्राइज सीरीज इंडिया 2019 के तहत पंजाब में नोबल प्राइज म्यूजियम की नई प्रदर्शनी का वर्ल्ड प्रीमियर किया गया है। यह हमारे शिक्षकों और विद्यार्थियों को दुनिया बदलने वाले आविष्कारों और उपलब्धियों के इस सफर को समझने का अवसर देगा। नोबल प्राइज सीरीज इंडिया के थीम पर लाउरा स्प्रेचमैन, सीओओ, नोबल मीडिया ने कहा, नोबल पुरस्कार दर्शाता है कि मानवता में दुनिया बदलने की ताकत है और इसकी शुरूआत शिक्षा से होती है। शिक्षा में निवेश करना भविष्य में निवेश करना है। सभी के लिए शिक्षा सुलभ करा कर हम मनुष्य की क्षमता व्यर्थ होने से बचा सकते हैं

 
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