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अमित शाह की रैली के विरोध से हरियाणा की शांति फिर दांव पर जाने कैसे ?

February 09, 2018 06:55 PM

Star Khabre, Haryana; 09th February : हरियाणा की शांति एक बार फिर दांव पर है। दो बार जाट आंदोलन और एक बार डेरा प्रेमियों की हिंसा का दंश झेल चुके हरियाणा में हालात फिर खराब होने के आसार है। दूसरी बार हरियाणा आ रहे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के विरोध के एलान और जाटों द्वारा बलिदान दिवस मनाने के फरमान से राज्य की शांति भंग होने की आशंका बन गई है। आपात स्थिति से निपटने के लिए हरियाणा ने केंद्र से अद्र्धसैनिक बलों की 150 कंपनियां मांगी हैं।

हरियाणा सरकार ने केंद्र से 150 कंपनियां मांगी, केंद्रीय गृह सचिव को कानून व्यवस्था की रिपोर्ट दी

केंद्रीय गृह मंत्री ने भी राज्य सरकार से पूरी रिपोर्ट तलब की है। राज्य के गृह सचिव एसएस प्रसाद ने केंद्रीय गृह सचिव को प्रदेश के पूरे हालात तथा कानून व्यवस्था की स्थिति के बारे में जानकारी दी है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के निर्देश पर गृह सचिव और डीजीपी समेत वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें राज्य भर में कानून व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा की गई तथा पुलिस व प्रशासनिक को चौकस रहने के लिए कहा गया है।

अमित शाह के हरियाणा आगमन और बलिदान दिवस कार्यक्रम से हालात बिगड़ने के आसार

उल्लेखनीय है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह 15 फरवरी को जींद आ रहे है। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति शाह के जींद दौरे का विरोध करेगी। साथ ही उनके आने के ठीक तीन दिन बाद 18 फरवरी को राज्य के जाटों ने बलिदान दिवस मनाने का एलान कर रखा है।

पिछले साल हुए आंदोलन में जाटों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं होने और आरक्षण की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं किए जाने से जाट खासे नाराज है। प्रदेश सरकार हालांकि जाटों पर दर्ज 70 मुकदमे वापस लेने का निर्णय ले चुकी है, लेकिन इस फैसले पर अभी अमल नहीं हुआ है। ऐसे में राज्य में तनाव की स्थिति बन रही है।

जाटों के साथ-साथ इनेलो भी कर रहा शाह का विरोध

अमित शाह के हरियाणा दौरे की तैयारियों में जुटी भाजपा व सरकार के लिए परेशानी खड़ी हो गई है। विधानसभा में विपक्ष के नेता अभय सिंह चौटाला ने भी एसवाइएल नहर निर्माण समेत जनहित के कई मुद्दों पर शाह को काले झंडे दिखाने व काले गुब्बारे छोड़कर विरोध जताने का एलान कर रखा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर भी शाह के आगमन के विरोध में है। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष यशपाल मलिक सरकार पर वादाखिलाफी के आरोप लगा रहे है।

तीन बार की हिंसा में मारे जा चुके 73 लोग

हरियाणा में अब तक तीन बार हुई हिंसा में 73 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य में दो बार जाट आंदोलन हुआ। 2016 के जाट आंदोलन में 31 लोगों की मौत हुई थी और 800 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति खाक हो गई थी। पंचकूला में हुई डेरा प्रेमियों की हिंसा में 42 लोग मारे गए थे। अब फिर उसी तरह के हालात बन रहे है।

हालात बिगड़े तो बजट सत्र पर पड़ेगा असर, सीएम ने ली रिपोर्ट

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने राज्य के गृह सचिव और डीजीपी से पूरी रिपोर्ट ली है। उन्होंने मुख्य सचिव और गृह सचिव को आदेश दिए कि सभी जिलों में स्थिति पर निगाह रखी जाए तथा अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के आदेश जारी किए जाएं। राज्य का बजट सत्र 5 मार्च से आरंभ होने के आसार है। यदि स्थिति बिगड़ती है तो फिर से बजट सत्र में हंगामा होने के पूरे आसार रहेंगे।  

सांसद सैनी ने जाटों से केस वापस लेने पर उठाए सवाल, अमित शाह की रैली से पहले मुखर

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रैली से पहले सांसद राजकुमार सैनी ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की आंदोलन की चेतावनी के बीच हरियाणा सरकार द्वारा जाटों पर दर्ज 70 से अधिक केस वापस लेने पर सवाल उठाए हैं।

बता दें कि सांसद सैनी पिछले कई दिनों से बगावती सुर अपनाए हुए हैं। उन्होंने अलग पार्टी बनाने और विधानसभा चुनाव लडऩे का संकेत दे रखा है। सांसद राजकुमार सैनी का कहना है कि यह बेहद संवेदनशील मामला है। सरकार को दबाव में आकर जाटों के ऊपर दर्ज केस वापस नहीं लेने चाहिए। उन्‍होंने कहा कि इससे प्रदेश की अन्य 35 बिरादरी के लोगों के समक्ष सरकार के प्रति गलत संदेश जा रहा है। बता दें कि जाटों के विरूद्ध दर्ज 70 मुकदमों को वापस लेने से 822 लोगों को राहत मिलेगी। पहले भी करीब 200 मुकदमे वापस लिए जा चुके हैं। भाजपा सांसद सैनी शुरू से ही जाटों को आरक्षण दिए जाने का विरोध करते हुए अपनी सरकार के खिलाफ अलग सुर अलाप रहे हैं। राजकुमार सैनी ने कहा कि रोहतक शहर में आज भी हिंसक आंदोलन के अवशेष देखने को मिलते हैं। हिंसक आंदोलन के कारण हरियाणा की छवि पूरे देश ही नहीं बल्कि समूचे विश्व में धूमिल हुई थी। इसके बावजूद सरकार केस वापस लेकर अपनी कमजोरी को सार्वजनिक कर रही है। भाजपा सांसद ने कहा कि सरकार के इस फैसले से साफ झलक रहा है कि एक जाति विशेष के लोग आज भी प्रदेश को अपने अनुकूल चला रहे हैं। सैनी ने सरकार से मांग उठाई कि उन्हें महज अमित शाह के दौरे और चुनाव को देखते हुए इस तरह का फैसला लेने से पहले पुनर्विचार करना चाहिए।

 
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